Holi Poem and Song

holi song and poem, music and dance have always been an important part of this Festivals. Infact, all indian festivals are not complete without poem ,song and music

It is how we express our joy, through poetry, songs and dance through centuries.

Bhartiye culture synonyms hai kavita, kala, gaane se . Hum saadio se in madhyamo se apni khushi aur ulas ko zahir kar rahe hai.

Mera to manna hai ki hum apne emotions achchi tarah kavita ya ganno is zahir kar paate hai.

Holi par to agar gaane aur dhol na ho to maaza hi kya.

Agar Holi ke kuch classic gaane soche jae to Rang barse (silsila movie) , Ang se ang lagana (Darr movie), aaj na chhodenge (Holi aai re movie) , Holi ke din (sholay movie) yaad aate hai.

Kuch nae gaane bhi popular hai jisme “balam pichkari (yeh jawani hai diwani)” , do me a favour, let’s play Holi (waqt) aur latest “Go pagal (Jolly LLB 2)” bhi achche hai.

Holi song and poem likhna sabke bas ki baat nahin hai. iske lie talent hona chahie par humare India mein talent ki koi kami nahin hai tabhi to saal dar saal itni achchi kavitae aur gaane sunnane ko milte hai.

Mujhe to hairani hoti hai kis tarah writer words ko use karke itna sundar flow bana lete hai aur unki vocabulary kitni acchi hoti hai.

Mere personal favourite Gulzar saab hai. Wo jis tarah wo shabdo ka istemal karte hai hairangi hoti hai par padne aur sunne mein bada maaza aata hai.

isiliye to muhavra ” aam khao guthlia mat ginno” sach hai. Hum aam khate hai aur anand lete hai.

Issi ke saath humara subhagya hai ki humare readers ne hume Holi ke vishye par stories, poems and songs bheje jisme se hume yeh achche laage jo hum publish kar rahe.

Asha karte hai Holi festival related story aur neeche di gai holi song (balgeet) and poem (kavita) for kids in Hindi.

Read on and enjoy Holi.

Holi song and poem in hindi

 

holi song and poem

Holi song and poem

Short story of Holi festival in Hindi- जलज की होली

Holi FestivalHoli festival is a gala day celebrated in India with colors in the month of March.

We Indians are always excited about Holi Festival especially Kids.

So are you ready to celebrate Holi 2017 with water guns , balloons and gulal colors!

Be careful ! use only herbal colors which are good for your skin and for the environment. Also use water wisely, it is very precious.

Here is a short story of Holi festival in Hindi of a boy, who is excited to celebrate Holi this year in his village with his complete family.

Enjoy Reading!

Story

Festivals एकता और सम्पनता (unity and prosperity) का प्रतिक (symbol) होते है और इन मोको पर समाज को अच्छी सीख (good cause) दी जाए तो एक तीर से दो निशान लग सकते है। इसी सीख को दर्शा रही है ये story of Holi Festival

जलज की होली

-किसलय हर्ष भारद्वाज,देवघर, झारखण्ड.

जलज इस बार होली में अपने गांव “कैथा ” जा रहा था.

holi festival boy

वह यह सोचकर खुश था कि इस बार वह अपने दादा-दादी, चाचा-चाची, तथा अपनी बहन अदिति के साथ मिलकर गांव में होली मनाएगा.

उसे पता था कि होली में गांव में मौज-मस्ती के साथ ही साथ उसे अच्छे -अच्छे पकवान और मिठाइयां भी खाने को मिलेंगीं.

होली के दिन गांव में गुझिया, रसमलाई, नारियल बर्फी, दही बड़े और ढोकला खूब बनते थे.

जलज ने पिछली होली चेन्नई  में अपने मम्मी-पापा के साथ मिलकर मनाई थी.

इस बार पापा ने अपने सभी जरुरी कार्य को निपटाकर होली के लिये अपनी कंपनी से कुछ दिनों की छुट्टी ले ली थी, और होली से  कुछ दिनों पहले ही जलज अपने मम्मी -पापा के साथ अपने गांव कैथा पहुंच गया.

जलज गांव पहुंचकर, सब लोगों से मिलकर बहुत खुश हुआ.

बच्चों की सभा – Holi celebration ideas

शाम के समय अदिति ने गांव के मैदान में बच्चों की सभा बुलाई. सभी बच्चे शाम के समय गांव के मैदान में एकत्रित हुए और होली की तैयारी पर चर्चा करने लगे.

कार्तिक ने कहा कि गांव में तो बड़े बुजुर्गो ने गाने- बजाने के साथ ही होली का शुभारंभ कर दिया है, लेकिन हमारी तैयारी अभी कुछ भी नहीं हुई है.

तब देवेंद्र ने कहा कि, इस बार होली में हम बाजार से पक्के और गाढ़े रंग लाएंगे, ताकि ये रंग कुछ दिनों तक तो लोगों के चेहरे पर दिखाई पड़े.

जलज ने देवेंद्र की बात को काटा और कहा कि पक्के और गाढ़े रंग हमारी त्वचा के लिये नुकसानदायक होते हैं, इसलिए हमें प्राकृतिक रंगों से ही होली मनानी चाहिए और जबरन किसी पर भी रंग नहीं डालना चाहिए. कार्तिक ने जलज की बात का समर्थन किया.

तब अदिति ने कहा कि इस बार होली हम कुछ अलग तरह से मनायेंगे.

Holi कुछ अलग तरह की

उसने कहा कि, जैसे पिछली बार दीपावली के समय गांव के सभी लोगों ने अपने घर के साथ ही साथ पूरे गांव की साफ-सफाई कर दी थी, उसी तरह अब हम प्रत्येक त्यौहार के शुरुआत होने से पहले अपने घर और अपने गांव की साफ-सफाई कर देंगे, जिससे हमारा गांव खुबसूरत दिखाई दे.

पूर्वी और नव्या ने अदिति की बात का समर्थन किया और कहा कि हम साफ-सफाई के साथ ही साथ एक सांस्कृतिक कार्यक्रम (cultural evening)का भी आयोजन करेंगे, जिसमें गांव के सभी लोग भाग लेंगे.

कार्तिक और देवेंद्र ने कहा कि, तब तो बहुत आनंद आएगा. हम लोग नाचेंगे, गाएंगे, कविता-पाठ करेंगे और जम कर होली खेलेंगे.

जलज और अदिति को यह प्रस्ताव अच्छा लगा और सभी बच्चें बहुत खुश हुए.

दूसरे दिन सभी बच्चों ने मिलकर गांव की साफ-सफाई प्रारम्भ कर दी. बच्चों को साफ-सफाई करता देख कर बड़ों ने भी उनका खुलकर सहयोग किया.

शाम होने तक गांव की काया-पलट हो चुकी थी.

गांव दिखने में बहुत सुंदर लग रहा था.

अब होली आने में भी दो ही दिन शेष बचे थे, इसलिए दूसरे दिन बच्चों ने गांव के मैदान में ही सांस्कृतिक कार्यक्रम का आयोजन किया.

सभी ने इसमें भाग लिया और कुछ न कुछ किया. सभी गांव वालों ने सांस्कृतिक कार्यक्रम का आनंद लिया और बच्चों की कार्यकुशलता और योग्यता की प्रशंसा की.

दूसरे दिन होली आ चुकी थी, जिसका सभी कई दिनों से इंतजार कर रहे थे. गांव के सभी लोग सुबह-सुबह उठ गए थे. सभी लोगों ने जम कर होली खेली.

playing holi

जलज ने भी जम कर होली खेली और मन भर कर पकवान और मिठाइयां खाई. वह बहुत खुश था.उसे इसी तरह की होली पसंद थी.

वह सोच रहा था कि, चेन्नई जाकर वह अपने मित्रों को कैथा गांव की होली के बारे में बतायगा और उन्हें भी आस-पास की साफ-सफाई के साथ ही साथ अच्छी होली खेलने के लिये प्रेरित करेगा.

ऐसी और भी रोमांचक कहानियाँ  www.nanheysamrat.com पड़े . Subscribe to our newsletter and comment below.

“सुझाव नहीं सहयोग दीजिये “

Inspirational story in Hindi with a message related to Swachh Bharat Abhiyan

Swachh Bharat Abhiyan को हम सब जानते ही है। मैं Delhi के एक popular area में सभ्य कॉलोनी में रहती हुँ, जहाँ मेरे हिसाब से civilized और educated  लोग रहते है। बहुत ख़ुशी हुई थी जब 2nd October को Narender Modi Ji ने ये program शुरू किया था पर अब निराशा पूर्वक  कहना पड़ रहा है ये ज़्यादा सफल नहीं हुआ और होगा भी कैसे पहले जनता तो स्वछता का महत्व समझे।

swachh bharat abhiyan

आप हैरान होंगे जब मैं आपको अपने पड़ोसी (neighbours) के पिछले 10 साल से चल रहे Ganda Bharat Abhiyan के बारे में बताऊंगी। जी हाँ ! कहने को बड़े आलीशान घर में रहने वाले सभ्य परिवार (affluent family)की पीछे की गली देखनी चाहिए।

इनका और इनके नौकरो का मानना है की घर साफ़ करके बाकी सारा कूड़ा (garbage), घर के बाहर फेक देना चाहिए जिसमे बच्चो के Diaper , सर्फ की थैलिया (surf packets) , अन्य खान पान की थैलिया , fused bulb and tubes , पुराने कपड़े (old clothes) यु माने के सब कुछ पीछे से नीचे गिरता है। और तो और पानी की मोटर चलाते है तो घंटो पानी गिरता रहता है।

लाख दफा उनको समझाया पर उनके कानो में जूं भी न रेंगी। MCD में कई बार complaint की, इन्होंने chalan और bribe भी भरे पर समझ नहीं आई। कई बार सफाई कराई पर कुछ दिन बाद फिर वही हाल। Facebook पर भी शोर मचाया , Mr Kejriwal को भी लिखा। एक बार सफाई तो हो गई पर उन पर कोई action नहीं हुआ।

थक हार कर हम चुप हो गए पर वो नहीं सुधरे। अब आप ही बताए ऐसे लोगो का क्या करे? रोज़ रात ठीक 10 बजे पोचे की बाल्टी का पानी ऊपर से नीचे गिरता है बिन्नागा ।

(इस post के end में देखे हमारे पड़ोसी के अभियान की  तस्वीर क्योकि मैं पहले आपको गंद नहीं दिखाना चाहती।)

दिव्या की कहानी पड़ी तो नई प्रेरणा मिली । फिर से इनको सुधारने की आस जगी है देखते है कितने सफल होते है ।

आप यह रोमांचक पौराणिक story पड़े ki kaise angry birds sabhi ko ikatha karti hai और इससे खुद भी सीख ले और दूसरों को भी दे क्योकि Swachh Bharat Abhiyan ko safal banana humara farz hai

“सुझाव नहीं सहयोग दीजिये “- Story of angry birds showing importance of contribution. A way to understand swachh bharat abhiyan

– दिव्या कुमारी जैन, चित्तौड़गढ़, (राजस्थान) 

angry bird

नदी किनारे स्थित एक पेड़ पर चिड़िया का घोसला था। एक बार हवा की तेजी से चिड़िया का घोसला नीचे नदी मैं गिर गया और जब तक चिड़िया सम्भली नदी का तेज बहाव उसे बहा ले गया। चिड़िया ने प्रयास किया पर कुछ नहीं कर पाई। तब गुस्से मैं चिड़िया (angry bird) ने निर्णय लिया की अगर उसके अंडे नदी ने नहीं दिए तो वह नदी को सूखा देगी और वह उसको सूखाने के प्रयास मैं लग भी गई।

चिड़िया चोंच मैं रेत के दाने लती और नदी मैं डाल देती। अन्य चिड़ियाओं ने उसे ऐसा करते देखा तो उससे पूछा – “बहिन यह किया कर रही हो।”  चिड़िया ने सारी बात बता दी। तब अन्य चिड़ियाएं बोली – “क्या तुम्हारा प्रयास इस नदी को सूखा पायेगा।”  यह सुनकर वह चिड़िया (angry bird) मासूमियत से बोली – “बहन मुझे आपका सुझाव नहीं सहयोग चाहिए, अगर दे सकती हो तो ठीक अन्यथा यहाँ से जाइये मेरे कार्य मैं बाधक मत बनिए।” अब इसकी इजाजत का सवाल था और सभी चिड़िया उसके साथ लग गई।

शाम होने को थी। उधर से पक्षियों का झुण्ड गुजर रहा था। उन्होंने जब चिड़ियाओं को नदी मैं रेत – मिट्टी डालते देखा तो उनसे रहा नहीं गया। वे नजदीक आये और चिड़ियाओं से कारण पूछा तब चिड़ियाओं ने कारण बता दिया। कारण सुन कर पक्षी बोले भला तुम्हारे प्रयास से यह नदी कैसे सूखेगी? चिड़ियाएं सामूहिक रूप से बोली (angry birds) – “सुझाव नहीं सहयोग, अगर सहयोग दे सकते हो तो ठीक अन्यथा जाओ यहाँ से। ” अब पक्षियो की इज्जत का सवाल था वे भी कार्य मैं लग गए और देखते ही देखते हजारो पक्षी चोंच में रेट भरकर नदी में डालने लग गए।

मित्रों जब यह कार्य चल ही रहा था तब उधर से भगवन विष्णु का निकलना हुआ जो अपने वाहन गरुड़ जी पर सवार थे।  गरुड़ जी की दृष्टि नीचे गई तो उन्हें पक्षियों को अजीब हरकत करते हुए देखा।  उत्सुकतावश वह नीचे उतरे और उन्होंने पक्षियों को पूछा तो पक्षियों ने उन्हें सारा कारण  बता दिया।  तब गरुड़ जी बोले, “तुम्हारे प्रयास से यह बहती नदी कभी नहीं सूख सकती। ” यह सुनकर वह चिड़िया मासूमियत से बोली, “गरुड़ दादा सुझाव नहीं सहयोग दीजिये।वह सोच में पड़ गए कियोकि पक्षी जाति की इज्जत का सवाल था तो ऐसे में गरुड़ जी पीछे कैसे रहते। वे विष्णु भगवन से बोले, “भगवन यह मेरे बहनो-भइयो की इज्जत व प्रतिष्ठा का मामला है।  अंत: आप कुछ देर यहाँ रुकें मैं अपने साथियो का सहयोग करके आता हूँ और गरुड़ जी अन्य गरुड़ों को बुलाकर अपने कार्य  में लग गए।

उधर विष्णु जी परेशान उन्हें कहीं जाना था पर गरुड़ जी जाने को तैयार नहीं कियोकि उनकी जाति की इज्जत, सम्मान व एकता का प्रश्न था।  भगवान के बार-बार कहने के बाद गरुड़ जी ने कहा, “भगवान आप मुझे क्षमा करें पर यह हमारी एकता का मामला है, मैं इनको अकेला नहीं छोड़ सकता। ”  त्रिलोकी नाथ बोले, “तुम यह क्या मूर्खता कर रहे हो , तुम कितना भी प्रयास करों बहती नदी कभी नहीं सूख सकती।” यह सुनकर सारे पक्षी (angry birds together) सामूहिक स्वर में बोले, “भगवान सुझाव नहीं सहयोग, आपको सहयोग करना है तो ठीक अन्यथा…. ” अब तो भगवान की प्रतिष्ठा की भी बात आ गई साथ ही उनहे गरुड़ जी को भी साथ लेना था।  तो वे भी साथ देने को तैयार हो गए। जब नदी ने देवताओं के साथ स्वयं त्रिलोकी नाथ को आते देखा तो वह घबरा गई।  वह साक्षात् प्रकट होकर बोली, “प्रभु क्षमा-क्षमा-क्षमा, मुझे मत सुखाओ, मैं इसके अंडे अभी लौटती हूँ। ” और नदी ने उस नन्ही, भोली, मासूम चिड़िया के अंडे सौंप दिये। चिड़िया बहुत खुश हुई। उसने सबका आभार व्यक्त किया जिनके सहयोग से उसे अपनी अंडे मिले।
मित्रों, यही स्थति वर्तमान में भी देखने को मिल जाती है , हम किसी अच्छे कार्य करने वाले के मार्ग में रुकावट बन जाते हैं। उसको सहयोग नहीं करते हाँ सुझाव की झड़ी जरूर लगा देते हैं।  अगर  सुझाव की जगह सब लोग सहयोग करने की प्रवर्ति अपना ले तो कोई कार्य असंभव नहीं।  सब मुमकिन हैं बस सहयोग की आवश्यकता है।  आज देश में “स्वच्छ व स्वस्थ भारत अभियान ”  चल रहा है।  swachh bharat abhiyan जोर-शोर से चल रहा है। ऐसे में आप किन्तु परंतु की भावना न रखते हुए सुझाव की जगह सहयोग दें।  अगर ऐसा  हुआ तो शीघ्र ही हमारा swachh bharat भी होगा। देश पॉलीथिन की थैलियों के जहर से मुक्त होगा , नशीले पदार्थो से मुक्त होगा, घर-घर शौचालय भी बनेगे, उनका उपयोग भी होगा।  बस सहयोग-सहयोग- सहयोग- सहयोग दीजिये।
 swachh bharat abhiyan- toilets
हर कोई  swachh bharat abhiyan के सपने को सच करना चाहता है । और तो और इस abhiyan की निंदा भी करते  है पर कभी अपने यह सोचा है की यह अभियान सबके संयोग से ही सफल हो सकता है। अगर हम अपने आस पास सफाई न रखे और सोचे को दूसरा कर लेगा या फिर ये सरकार का काम है तो हम गलत है।  स्वछता हम सबका अधिकार है जिसमे सभी का योगदान ज़रूरी है. जब हम USA या Europe के देशो की सुंदरता की तारीफ करते है तो ये भूल जाते है की वहां सफाई पर सख्त ध्यान रखा जाता है जो Government और Citizen साथ मिल कर करते है।
Contribution to swachh bharat abhiyan is very important to help India grow. clean environment is important for everyone’s health especially for our kids.
Are you doing enough for the environment. share your experience in below comment box and more inspirational stories on nanheysamrat.com
In end, look at the horrible picture of our backside thanks to our neighbours.
swachh bharat abhiyan- grabage on street
देखिए कितनी गन्दगी मचाई हुई है।