A Short Hindi Story for Kids – दोस्तों कि बहादुरी

hindi story A short Hindi story written by  Sudhakar Srivastava with an important social message to teach kids importance of unity among different castes, religions, country and people, strength in friendship and the ability teamwork to achieve impossible.

Read on a simple Hindi story with a clear message……

Hindi Story- दोस्तों कि बहादुरी

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मित्रम प्रदेश के गंडक वन में चार दोस्त थे. गोलू हाथी, मस्ताना घोड़ा, चम्पू बन्दर और स्वीटी चींटी. 

उनकी दोस्ती बहुत ही मजबूत थी.

जंगल के बाकी जानवर उनकी दोस्ती पर अक्सर हँसते थे, कि कैसी अजीब चौकड़ी है.

एक इतना विशाल और एक इतनी छोटी कि दोनों एक दूसरे कि बात तक नहीं सुन सकते.

एक पेड़ पर ही चढ़ा रहता है और उछलता है तो दूसरे को मिले तो हर दम दौड़ता ही रहे.

लेकिन कुदरत का करिश्मा था कि वो चारों एक दूसरे को समझते थे और हमेशा साथ रहते थे.

एक दिन चारों दोस्त दोपहर में आराम कर रहे थे, तभी चम्पू बन्दर जो पेड़ पर बैठ कर मस्ती में सो रहा था, चिल्ला पड़ा और दौड़कर नीचे आ गया.

सब घबरा कर पूछने लगे कि क्या हुआ. तो उसने बताया कि शिकारियों कि पूरी टीम आयी हुई है और

अभी सब आराम कर रहे हैं तो उन्होंने अपने महाराज सिंघम को पकड़ लिया है.

लगता है कि उनकी योजना महारानी और महाराज के परिवार के और लोगों को भी पकड़ने की है.

सभी दोस्त सोचने लगे कि क्या किया जाये.

वो महाराज कि सेना को सूचना दे सकते थे, लेकिन महाराज का महल बहुत दूर था और जब तक वो लोग

पहुचते तब तक शिकारी अपना काम कर चुकते.

फिर भी उन्होंने सोचा कि मस्ताना घोड़ा तुरंत दौड़ कर जाये और सेना को सूचना दे, तब तक वो लोग कोशिश करते हैं कि शिकारियों को रोक सके.

यही सोच कर गोलू हाथी और चम्पू  बन्दर शिकारियों के ठहरने कि जगह को चलने लगे तभी स्वीटी चींटी ने कहा कि वो भी कुछ करेगी.

फिर कुछ सोच कर उसने अपनी आस पास के सारी चींटियों को बुला लिया, सब तुरंत आ गयी.

उसके बाद सब गोलू हाथी के ऊपर करोड़ों कि संख्या में सब चढ़ गयी क्योंकि वो तेज चल सकता था.

चम्पू बन्दर पेड़ों में छुप-छुप कर आगे-आगे चल रहा था और हाथी पीछे थोड़ा दूरी पर.

जब गोलू हाथी और सब दोस्त वहाँ पर पहुचे तब शिकारी खाना खाकर बस निकलने कि तयारी ही कर रहे थे.

तब सारी चींटियाँ उतर कर चुपके से शिकारियों कि पास पहुचने लगी जो कि कोई 20 थे.

छोटी होने कि वजह से चींटियों को कोई देख भी नहीं पाया. फिर एक – एक शिकारी पर हजारों चींटियों ने हमला कर दिया.

शिकारी छटपटाने लगे. इतनी देर में गोलू बन्दर ने जाकर उनकी सब बंदूके और हथियार उठा लिए.

शिकारियों ने बहुत सी चींटियों को मारा लेकिन थोड़ी ही देर में उनकी दर्द के मारे हालत बुरी होने लगी.

उन्होंने सोचा कि भाग कर किसी तालाब में जाये तभी छुटकारा मिलेगा.

उसी समय हाथी बहार निकल आया, क्योंकि बन्दर अपना काम कर चुका था.

फिर तो हाथी ने शिकारियों को खूब पटक पटक कर मारा.

उसने सिंघम को भी छुड़ा दिया था और मस्ताना घोड़ा भी राजा जी कि सेना को लेकर आ गया था.

सारे शिकारी घेर लिए गए.

सिंघम ने जंगल के अधिकारीयों को अपने तोते डाकिये को भेज कर बुलवा भेजा और शिकारियों को सरकार के हवाले कर दिया लेकिन उनकी बंदूके और हथियार नदी में फिंकवा दिए.

उसके बाद महाराज और पूरे जंगल के सभी जानवरों ने चारों दोस्तों और चींटियों कि बहादुरी और होशियारी कि खूब सराहना की.

सिंघम ने कहा हमें अलग अलग लोगों से मिलकर रहना चाहिए क्योंकि एकता में ही सबसे बड़ी ताकत होती है.

साथ ही ये भी कि मुसीबत के समय घबराने के बजाए हिम्मत और सूझ बूझ से काम करना चाहिए.

छोटे बड़े से नहीं बल्कि अपनी क्षमता से मुसीबत का सामना आराम से किया जा सकता है.

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