“सुझाव नहीं सहयोग दीजिये “

Inspirational story in Hindi with a message related to Swachh Bharat Abhiyan

Swachh Bharat Abhiyan को हम सब जानते ही है। मैं Delhi के एक popular area में सभ्य कॉलोनी में रहती हुँ, जहाँ मेरे हिसाब से civilized और educated  लोग रहते है। बहुत ख़ुशी हुई थी जब 2nd October को Narender Modi Ji ने ये program शुरू किया था पर अब निराशा पूर्वक  कहना पड़ रहा है ये ज़्यादा सफल नहीं हुआ और होगा भी कैसे पहले जनता तो स्वछता का महत्व समझे।

swachh bharat abhiyan

आप हैरान होंगे जब मैं आपको अपने पड़ोसी (neighbours) के पिछले 10 साल से चल रहे Ganda Bharat Abhiyan के बारे में बताऊंगी। जी हाँ ! कहने को बड़े आलीशान घर में रहने वाले सभ्य परिवार (affluent family)की पीछे की गली देखनी चाहिए।

इनका और इनके नौकरो का मानना है की घर साफ़ करके बाकी सारा कूड़ा (garbage), घर के बाहर फेक देना चाहिए जिसमे बच्चो के Diaper , सर्फ की थैलिया (surf packets) , अन्य खान पान की थैलिया , fused bulb and tubes , पुराने कपड़े (old clothes) यु माने के सब कुछ पीछे से नीचे गिरता है। और तो और पानी की मोटर चलाते है तो घंटो पानी गिरता रहता है।

लाख दफा उनको समझाया पर उनके कानो में जूं भी न रेंगी। MCD में कई बार complaint की, इन्होंने chalan और bribe भी भरे पर समझ नहीं आई। कई बार सफाई कराई पर कुछ दिन बाद फिर वही हाल। Facebook पर भी शोर मचाया , Mr Kejriwal को भी लिखा। एक बार सफाई तो हो गई पर उन पर कोई action नहीं हुआ।

थक हार कर हम चुप हो गए पर वो नहीं सुधरे। अब आप ही बताए ऐसे लोगो का क्या करे? रोज़ रात ठीक 10 बजे पोचे की बाल्टी का पानी ऊपर से नीचे गिरता है बिन्नागा ।

(इस post के end में देखे हमारे पड़ोसी के अभियान की  तस्वीर क्योकि मैं पहले आपको गंद नहीं दिखाना चाहती।)

दिव्या की कहानी पड़ी तो नई प्रेरणा मिली । फिर से इनको सुधारने की आस जगी है देखते है कितने सफल होते है ।

आप यह रोमांचक पौराणिक story पड़े ki kaise angry birds sabhi ko ikatha karti hai और इससे खुद भी सीख ले और दूसरों को भी दे क्योकि Swachh Bharat Abhiyan ko safal banana humara farz hai

“सुझाव नहीं सहयोग दीजिये “- Story of angry birds showing importance of contribution. A way to understand swachh bharat abhiyan

– दिव्या कुमारी जैन, चित्तौड़गढ़, (राजस्थान) 

angry bird

नदी किनारे स्थित एक पेड़ पर चिड़िया का घोसला था। एक बार हवा की तेजी से चिड़िया का घोसला नीचे नदी मैं गिर गया और जब तक चिड़िया सम्भली नदी का तेज बहाव उसे बहा ले गया। चिड़िया ने प्रयास किया पर कुछ नहीं कर पाई। तब गुस्से मैं चिड़िया (angry bird) ने निर्णय लिया की अगर उसके अंडे नदी ने नहीं दिए तो वह नदी को सूखा देगी और वह उसको सूखाने के प्रयास मैं लग भी गई।

चिड़िया चोंच मैं रेत के दाने लती और नदी मैं डाल देती। अन्य चिड़ियाओं ने उसे ऐसा करते देखा तो उससे पूछा – “बहिन यह किया कर रही हो।”  चिड़िया ने सारी बात बता दी। तब अन्य चिड़ियाएं बोली – “क्या तुम्हारा प्रयास इस नदी को सूखा पायेगा।”  यह सुनकर वह चिड़िया (angry bird) मासूमियत से बोली – “बहन मुझे आपका सुझाव नहीं सहयोग चाहिए, अगर दे सकती हो तो ठीक अन्यथा यहाँ से जाइये मेरे कार्य मैं बाधक मत बनिए।” अब इसकी इजाजत का सवाल था और सभी चिड़िया उसके साथ लग गई।

शाम होने को थी। उधर से पक्षियों का झुण्ड गुजर रहा था। उन्होंने जब चिड़ियाओं को नदी मैं रेत – मिट्टी डालते देखा तो उनसे रहा नहीं गया। वे नजदीक आये और चिड़ियाओं से कारण पूछा तब चिड़ियाओं ने कारण बता दिया। कारण सुन कर पक्षी बोले भला तुम्हारे प्रयास से यह नदी कैसे सूखेगी? चिड़ियाएं सामूहिक रूप से बोली (angry birds) – “सुझाव नहीं सहयोग, अगर सहयोग दे सकते हो तो ठीक अन्यथा जाओ यहाँ से। ” अब पक्षियो की इज्जत का सवाल था वे भी कार्य मैं लग गए और देखते ही देखते हजारो पक्षी चोंच में रेट भरकर नदी में डालने लग गए।

मित्रों जब यह कार्य चल ही रहा था तब उधर से भगवन विष्णु का निकलना हुआ जो अपने वाहन गरुड़ जी पर सवार थे।  गरुड़ जी की दृष्टि नीचे गई तो उन्हें पक्षियों को अजीब हरकत करते हुए देखा।  उत्सुकतावश वह नीचे उतरे और उन्होंने पक्षियों को पूछा तो पक्षियों ने उन्हें सारा कारण  बता दिया।  तब गरुड़ जी बोले, “तुम्हारे प्रयास से यह बहती नदी कभी नहीं सूख सकती। ” यह सुनकर वह चिड़िया मासूमियत से बोली, “गरुड़ दादा सुझाव नहीं सहयोग दीजिये।वह सोच में पड़ गए कियोकि पक्षी जाति की इज्जत का सवाल था तो ऐसे में गरुड़ जी पीछे कैसे रहते। वे विष्णु भगवन से बोले, “भगवन यह मेरे बहनो-भइयो की इज्जत व प्रतिष्ठा का मामला है।  अंत: आप कुछ देर यहाँ रुकें मैं अपने साथियो का सहयोग करके आता हूँ और गरुड़ जी अन्य गरुड़ों को बुलाकर अपने कार्य  में लग गए।

उधर विष्णु जी परेशान उन्हें कहीं जाना था पर गरुड़ जी जाने को तैयार नहीं कियोकि उनकी जाति की इज्जत, सम्मान व एकता का प्रश्न था।  भगवान के बार-बार कहने के बाद गरुड़ जी ने कहा, “भगवान आप मुझे क्षमा करें पर यह हमारी एकता का मामला है, मैं इनको अकेला नहीं छोड़ सकता। ”  त्रिलोकी नाथ बोले, “तुम यह क्या मूर्खता कर रहे हो , तुम कितना भी प्रयास करों बहती नदी कभी नहीं सूख सकती।” यह सुनकर सारे पक्षी (angry birds together) सामूहिक स्वर में बोले, “भगवान सुझाव नहीं सहयोग, आपको सहयोग करना है तो ठीक अन्यथा…. ” अब तो भगवान की प्रतिष्ठा की भी बात आ गई साथ ही उनहे गरुड़ जी को भी साथ लेना था।  तो वे भी साथ देने को तैयार हो गए। जब नदी ने देवताओं के साथ स्वयं त्रिलोकी नाथ को आते देखा तो वह घबरा गई।  वह साक्षात् प्रकट होकर बोली, “प्रभु क्षमा-क्षमा-क्षमा, मुझे मत सुखाओ, मैं इसके अंडे अभी लौटती हूँ। ” और नदी ने उस नन्ही, भोली, मासूम चिड़िया के अंडे सौंप दिये। चिड़िया बहुत खुश हुई। उसने सबका आभार व्यक्त किया जिनके सहयोग से उसे अपनी अंडे मिले।
मित्रों, यही स्थति वर्तमान में भी देखने को मिल जाती है , हम किसी अच्छे कार्य करने वाले के मार्ग में रुकावट बन जाते हैं। उसको सहयोग नहीं करते हाँ सुझाव की झड़ी जरूर लगा देते हैं।  अगर  सुझाव की जगह सब लोग सहयोग करने की प्रवर्ति अपना ले तो कोई कार्य असंभव नहीं।  सब मुमकिन हैं बस सहयोग की आवश्यकता है।  आज देश में “स्वच्छ व स्वस्थ भारत अभियान ”  चल रहा है।  swachh bharat abhiyan जोर-शोर से चल रहा है। ऐसे में आप किन्तु परंतु की भावना न रखते हुए सुझाव की जगह सहयोग दें।  अगर ऐसा  हुआ तो शीघ्र ही हमारा swachh bharat भी होगा। देश पॉलीथिन की थैलियों के जहर से मुक्त होगा , नशीले पदार्थो से मुक्त होगा, घर-घर शौचालय भी बनेगे, उनका उपयोग भी होगा।  बस सहयोग-सहयोग- सहयोग- सहयोग दीजिये।
 swachh bharat abhiyan- toilets
हर कोई  swachh bharat abhiyan के सपने को सच करना चाहता है । और तो और इस abhiyan की निंदा भी करते  है पर कभी अपने यह सोचा है की यह अभियान सबके संयोग से ही सफल हो सकता है। अगर हम अपने आस पास सफाई न रखे और सोचे को दूसरा कर लेगा या फिर ये सरकार का काम है तो हम गलत है।  स्वछता हम सबका अधिकार है जिसमे सभी का योगदान ज़रूरी है. जब हम USA या Europe के देशो की सुंदरता की तारीफ करते है तो ये भूल जाते है की वहां सफाई पर सख्त ध्यान रखा जाता है जो Government और Citizen साथ मिल कर करते है।
Contribution to swachh bharat abhiyan is very important to help India grow. clean environment is important for everyone’s health especially for our kids.
Are you doing enough for the environment. share your experience in below comment box and more inspirational stories on nanheysamrat.com
In end, look at the horrible picture of our backside thanks to our neighbours.
swachh bharat abhiyan- grabage on street
देखिए कितनी गन्दगी मचाई हुई है।
 

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